2025 का भारतीय बजट: मध्यम वर्ग के लिए राहत और समावेशी विकास का रोडमैप

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2025 को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया। इस बजट में मध्यमवर्गीय परिवारों की आय और खपत बढ़ाने, कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने, और समावेशी विकास को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया है।


मुख्य बिंदु:

  1. आयकर में राहत:

    • मध्यमवर्गीय करदाताओं के लिए आयकर की शुरुआत की सीमा बढ़ाकर 12.75 लाख रुपये वार्षिक कर दी गई है, जिससे 12.75 लाख रुपये तक की आय पर कोई आयकर नहीं लगेगा।
  2. कृषि क्षेत्र:

    • "दालों में आत्मनिर्भरता मिशन" की शुरुआत की जाएगी, जिससे दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
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    • प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत 1.7 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे, जिनमें 100 निम्न उत्पादन वाले जिले शामिल हैं।
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  3. मध्यम, लघु और सूक्ष्म उद्यम (MSME):

    • नए उद्यमियों, विशेषकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए बिना गारंटी के 2 करोड़ रुपये तक के ऋण की योजना शुरू की जाएगी।
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  4. निवेश और निर्यात:

    • निवेश को बढ़ावा देने के लिए विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की सीमा बीमा क्षेत्र में 100% तक बढ़ाई जाएगी।
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    • निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष मिशन स्थापित किए जाएंगे।
  5. बुनियादी ढांचा और विकास:

    • इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास, क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी, और महत्वपूर्ण खनिजों के विकास पर जोर दिया जाएगा।
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  6. आर्थिक वृद्धि और राजकोषीय घाटा:

    • सरकार ने 2025-26 के लिए नाममात्र GDP वृद्धि दर 10.1% और राजकोषीय घाटा GDP का 4.4% निर्धारित किया है।
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इस बजट का उद्देश्य मध्यमवर्गीय परिवारों की आय और खपत बढ़ाना, कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करना, और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।



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